नई दिल्ली: यूपी चुनाव की तैयारी में जुटे राहुल-अखिलेश, दिल्ली में बनी सीट बंटवारे और गठबंधन रणनीति की रूपरेखा, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस ने तेज की तैयारियां
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर विपक्षी खेमे में हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही राज्य में बीजेपी को चुनौती देने के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बीच दिल्ली में चुनावी रणनीति, गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर अहम चर्चा हुई है।
गठबंधन बरकरार रखने पर दोनों दलों की सहमति
लोकसभा चुनाव 2024 में साथ मिलकर चुनाव लड़ने के बाद सपा और कांग्रेस के रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत नजर आ रहे हैं। दोनों दलों का मानना है कि विपक्षी वोटों के बिखराव को रोकने के लिए गठबंधन बनाए रखना जरूरी है। अखिलेश यादव पहले भी साफ कर चुके हैं कि उनका फोकस सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता वाले उम्मीदवारों पर रहेगा।
सीट शेयरिंग पर शुरू हुई अंदरूनी कवायद
सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने अपने नेताओं और पदाधिकारियों से यह फीडबैक लेना शुरू कर दिया है कि किन सीटों पर कांग्रेस को मौका दिया जा सकता है। वहीं कांग्रेस भी प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों का आकलन कर रही है और संभावित उम्मीदवारों की सूची तैयार कर रही है। पार्टी चाहती है कि सीट बंटवारे की बातचीत शुरू होने से पहले उसके पास मजबूत दावेदारों की सूची तैयार हो।
कांग्रेस की नजर 100 से ज्यादा सीटों पर
कांग्रेस राज्य में अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने के लिए 100 से 120 विधानसभा सीटों पर दावेदारी तैयार कर रही है। हालांकि अंतिम समझौते में सीटों की संख्या कम हो सकती है। पार्टी का मानना है कि रायबरेली, अमेठी, प्रयागराज, सहारनपुर और अन्य प्रभाव वाले क्षेत्रों में उसे मजबूत हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
सपा का फोकस ‘विनेबिलिटी’ फॉर्मूले पर
समाजवादी पार्टी सीटों के बंटवारे में केवल संख्या को आधार नहीं बनाना चाहती। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जिस सीट पर जिस दल की जीत की संभावना अधिक हो, वहां उसी पार्टी को उम्मीदवार उतारना चाहिए। इसी रणनीति को सपा 2027 के चुनाव में भी लागू करना चाहती है।
निचले स्तर पर असंतोष भी चुनौती
हालांकि शीर्ष नेतृत्व गठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रहा है, लेकिन दोनों दलों के कई स्थानीय नेताओं और संभावित उम्मीदवारों को सीटों की संख्या कम होने की चिंता है। यही वजह है कि संगठन स्तर पर कुछ असंतोष भी देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद राहुल गांधी और अखिलेश यादव गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के पक्ष में माने जा रहे हैं।
बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी
सपा और कांग्रेस दोनों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता को विधानसभा चुनाव में भी दोहराया जा सकता है। इसी लक्ष्य के साथ दोनों दल सामाजिक समीकरण, उम्मीदवार चयन और सीट बंटवारे पर काम कर रहे हैं। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि यूपी में विपक्ष किस फॉर्मूले के साथ चुनावी मैदान में उतरता है।